Sunday, 18 February 2018

Biswamanab Siksha and Veda Yoga Avijan 204 dt 18/ 02/ 2018

Bisbamanaba शिक्षा और bedayajna संचालन (204) दिनांक: -18 / 02/2018 विषय: - [। Sibasaktike आप जागते रहने में के धार्मिक परंपराओं की कब्र पर वेदों jibatmake पूर्ण बलिदान] आज का सवाल
जिवात्मा और परमात्मा समान हैं, लेकिन आत्मा माया से बंधी है, परन्तु सभी स्थितियों से परमात्मा पूरी तरह से मुक्त है। आत्मा की आत्मा - उसके झुकाव से वस्तु तक, इसका दिल मंदिर के परब्रह्म के साथ पुल बांधकर इसे नहीं देखता है। परंपरागत मां केवल इस टाई से अपने बच्चे को मुक्त कर सकती है और परब्रह्म से जुड़ सकती है। यदि यह स्थिति प्राप्त की जाती है तो प्राणी जीवित नहीं रहता है तो यह भगवान ब्रह्मा की छाती पर रहता है। शिव की मूर्ति, जिसे हम माता के पैरों के नीचे देखते हैं, स्वयं जीवित आत्मा का शिवलवारा है। इस आत्मा-अज्ञानता की मूर्खता की अज्ञान-मोहरद कालिया विधवा थीं, उसने बच्चे को पैरा-ब्रह्मा गोद के साथ जागरूकता दी थी। हमें याद रखना चाहिए कि हम सब माँ प्रकृति के गर्भ से एक parabrahmera महामाया makalirupi मां के बीजों से प्राप्त कर रहे हैं। इसलिए, हम अपने माता-पिता से सद्गुरु के रूप में हमें मुक्ति और ब्रह्मजान्य देकर अपने जीवन और हमारी आत्मा को मुक्त कर सकते हैं। शांति की शांति

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