Sunday, 5 November 2017

Biswamanab Siksha and Veda Yoga Avijan 99 dt 05/ 11/ 2017

विश्व स्तर की शिक्षा और उत्कृष्टता अभियान (99) तिथि: -5 / 11/017 आज के विषय: - [सभी प्रभागों में दृष्टि और प्रेम की सभी अनूठी तकनीकों को सिखाएं]प्रेम की इस दुनिया में वेदों की पेशकश करके हमें पवित्र होना चाहिए। हमने वेदों से सीखा है - इडंग ब्रह्मा की सारी मूर्ति, ब्रह्माशमी अहंकार - जो कुछ मैं इस दुनिया में देख रहा हूं वह सभी अलग-अलग छवियां हैं; तो किसके से मैं नफरत करता हूं और न ही अनदेखा कर दूंगा; ईर्ष्या-ईर्ष्या कौन करेगा, जिसे हम प्यार नहीं कर सकते? इसलिए स्वामी विवेकानंद ने वेदों को त्याग करने के उद्देश्य से वेदों से कहा- मॉर्मो के शब्दों को सुनो - पता है कि जीवन की वास्तविक फव्वारा-लहर एक चाल के माध्यम से पारित हो सकती है - मंत्र तंत्र, जीवन-शासन, दर्शन, दर्शन, विज्ञान -सांति, भ्रम, बुद्धि, भ्रम, प्यार से प्यार ब्रह्मा से परमाणु की कीड़ा के लिए, प्रेम-मन को शरीर को आत्मा देना चाहिए, वह सब-सामने-सामने हो जाता है, जहां आप बहुत-बहुत ईश्वर की तलाश कर रहे हैं- प्रेम में प्रेम। हरि औन इतना ईमानदार

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